कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता

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कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता

कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता

कभी अभिमान तो कभी स्वाभिमान है पिता,
कभी धरती तो कभी आसमान है पिता
जन्म दिया है अगर मां ने
जानेगा जिससे जग वो पहचान है पिता,
कभी कंधे पे बिठाकर मेला दिखता है पिता,
कभी बनके घोड़ा घुमाता है पिता,
माँ अगर उँगली पकड़कर चलना सिखाती है,
तो पैरों पर खड़ा होना सिखाते हैं पापा। ️

हैप्पी फादर्स डे !

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